आत्म समर्पण - ZorbaBooks

आत्म समर्पण

तेरी सूरत जैसे चांद का दर्पण ।
ज़िन्दगी दे दी और क्या करूं अर्पण ।।
कोशिश पूरी करूंगा के तू खुश रहे ।
चाहे करना पड़े मुझे आत्म समर्पण ।।

Comments are closed.

Shishir Goel