जहां भी देखो सब परेशान नजर आते!
बाजारों, सड़कों पर, जहां देखो, इंसान नजर आते ।
किसी को किसी से मतलब नहीं ,परेशान नजर आते।
बेखुदी में सब चल रहें, होश की दवा , क्यों नहीं लेते
आंखो में इनकी झाँको, तो ये सब ,हैरान नजर आते ।
बड़ी गहरी ख़ामोशी है, तूफ़ानो से भी नहीं टूट पाती,
झकझोरने से ये सब शख्श , क्यों नादान नजर आते ।
हँसी के ठहाको में , हाल-ए दिल छुपा , चुप रह जाते ,
अपने ही घर में , अपनों के बीच , मेहमान नजर आते ।
भीड़ सी उमड़ रही , जिस डगर पर देखों , वहाँ राहुल
सोचो तो हकीकत में , ये रास्ते , सुनसान नज़र आते ।